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Saturday, June 20, 2020

देश में व्यक्ति-पूजन का जो दौर चल पड़ा है इस सन्दर्भ में यह तथ्य ओझल हो गया है कि वह व्यक्ति वस्तुततः क्यों पूजित हुआ? हम भारतीयों की तो बस एक ही आराध्या हैँ - भारत माता। जो भारत की अखण्डता की रक्षा करेगा वह हमारी नज़रों में सर्वश्रेष्ठ होगा। जो निजी राजनैतिक स्वार्थ या अपनी छवि धूमिल होने के डर से राष्ट्र के हितों के विरुद्ध कोई निर्णय लेगा , वह चाहे जो भी हो , उसके प्रति हमारी कोई निष्ठां नहीं होगी. यदि देश किसी व्यक्ति में अपनी संपूर्ण आस्था व्यक्त करता है तो वह भी अपने समर्थकों पर विश्वास करे, उन्हें राज़दार बनाये. मैं मान सकता हूँ की समसामयिक परिस्थितियों में भारत चीन से युद्ध नहीं लड़ सकता , इसके लिए अनेक सामरिक एवंअन्य कारण हो सकते हैं परन्तु उसके लिए ऐतिहासिक तथ्यों की बलि चढ़ दी जाय , हमारे जवानों के बलिदान की परिस्थितयों को विवादित कर दी जाय , यह अस्वीकार्य है। यह कहना कि चीन ने अतिक्रमण किया ही नहीं यह अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने से विलग आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा. वीरगर्भा भारत कभी तो निस्स्वार्थ भाव से मातृभूमि पर उत्सर्ग होने वाले नेता पैदा करेगी,कभी तो एक दूसरा मानेकशॉ पैदा होगा। लेकिन जब हम खुद अपना दवा खारिज कर देंगे तो क्या बचा? कल मैंने अपने वाल पर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। १० वर्ष की उम्र में ही ६२ के ज़िल्लत और भयंकर अपमान का दंश झेलने वाली पीढ़ी यह आस लगाए बैठी थी कि शायद हम लोगों के जीवन काल में ही उस अपमान का बदला ले सकें। साथ ही मन के कोने में यह भी आशंका थी की कही और दुर्दिन न देखना पड़े। वह भी देख ही लिया।I

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